मध्य प्रदेश के सागर जिले के उत्तर और दक्षिण वन मंडल से होकर गुजरने वाला नेशनल हाईवे-44 वन्यजीवों, विशेषकर तेंदुओं के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में हाईवे पर वाहनों की टक्कर से 5 तेंदुओं की मौत होने का दावा किया गया है। मालथौन से नरसिंहपुर तक लगभग 162 से 170 किलोमीटर के दायरे में फैला यह हाईवे जंगलों को दो हिस्सों में बांटता है। बताया जा रहा है कि तेंदुओं की मौत की घटनाएं मुख्य रूप से रात 2 से 4 बजे के बीच हुईं, जब वाहनों की गति अधिक और दृश्यता कम रहती है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सहित जिले के जंगलों में 80 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजामों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हाईवे पर गति नियंत्रण, वन्यजीव चेतावनी संकेत, निगरानी और सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था वन्यजीवों के लिए जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
सागर में NH-44 पर तेंदुओं की मौत का खतरा, दो साल में 5 की मौत का दावा; वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल
