बिलासपुर हाई कोर्ट ने बच्चे की Custody से जुड़े मामले में कहा है कि मां की दूसरी शादी बच्चे की Custody से उसे वंचित करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का हित और कल्याण सबसे ऊपर है। साथ ही केवल परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर Custody का फैसला नहीं किया जा सकता। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने जगदलपुर फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। बच्चे के चाचा और दादी की ओर से दायर अपील को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। 👥 Readers Opinion – सलाह Custody से जुड़े मामलों में बच्चे के हित और कल्याण को प्राथमिकता देना जरूरी है। कानूनी विवाद में कोर्ट की प्रक्रिया और निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। Readers Opinion – अब आपकी खबर हमारी आवाज़ AI tools are used For editing. generate thumbnail
मां की दूसरी शादी से Custody अधिकार खत्म नहीं होता | बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
