नासिक, महाराष्ट्र: सरकारी प्याज खरीद और भंडारण व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगभग 12 लाख क्विंटल प्याज ₹23 प्रति किलो की दर से खरीदा गया था। दावा है कि इसमें से करीब 9.6 लाख क्विंटल प्याज भंडारण के दौरान खराब हो गया।
रिपोर्ट में नासिक के चांदवड़ स्थित गोदाम में पानी भरने, प्याज के काले पड़ने और दुर्गंध आने की बात कही गई है। खराब प्याज को ₹1 प्रति किलो की दर से बेचने के लिए नीलामी किए जाने के बावजूद खरीदार नहीं मिलने का भी दावा है।
मामले की जांच के लिए नासिक के कलेक्टर के नेतृत्व में समिति गठित की गई है। समिति को खरीद केंद्रों और गोदामों का निरीक्षण कर 26 अक्टूबर तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
महत्वपूर्ण: प्याज की खरीद, बिक्री और खराब हुए स्टॉक के आंकड़े उपलब्ध रिपोर्ट में किए गए दावों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकारी खरीद और भंडारण में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। आपकी राय में ऐसी स्थिति के लिए जवाबदेही कैसे तय होनी चाहिए?
