मेडिकल में हिंदी का हश्र! 3 साल में ₹10 करोड़ खर्च, 50 हजार किताबें छपीं | हिंदी में परीक्षा नहीं

मध्यप्रदेश में मेडिकल शिक्षा को हिंदी माध्यम में बढ़ावा देने की योजना को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन साल में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए और करीब 50 हजार मेडिकल किताबें हिंदी में छापी गईं, लेकिन अब तक एक भी विद्यार्थी ने हिंदी माध्यम में परीक्षा नहीं दी। एमबीबीएस के हिंदी मॉडल को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने रिपोर्ट मांगी है। इस मॉडल के तहत मेडिकल की किताबों का हिंदी में अनुवाद कराया गया और विद्यार्थियों को हिंदी में पढ़ाई का विकल्प देने की तैयारी की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि बड़ी संख्या में किताबें तैयार होने के बावजूद हिंदी माध्यम में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या शून्य रही। ऐसे में योजना पर हुए खर्च, किताबों के इस्तेमाल और हिंदी माध्यम की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब एनएमसी की रिपोर्ट और आगे होने वाली समीक्षा से यह स्पष्ट होगा कि मेडिकल शिक्षा में हिंदी माध्यम के इस मॉडल को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा। 🔔 मध्यप्रदेश और इंदौर की महत्वपूर्ण खबरों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें और वीडियो शेयर करें। #MadhyaPradesh#MedicalEducation#MBBS#HindiMedium#NMC#EducationNews#MPNews#IndoreNews#MedicalNews 🔑 5 KEY POINTS 📚 मेडिकल शिक्षा में हिंदी माध्यम के मॉडल पर सवाल। 💰 तीन साल में करीब ₹10 करोड़ खर्च होने की बात सामने आई। 📖 करीब 50 हजार हिंदी मेडिकल किताबें छापी गईं। 📝 रिपोर्ट के मुताबिक एक भी विद्यार्थी ने हिंदी में परीक्षा नहीं दी। 🔎 एनएमसी ने हिंदी मॉडल को लेकर रिपोर्ट मांगी है।